जब आप "भारत रत्न" शब्द सुनते हैं तो दिमाग में तुरंत कुछ बड़े नाम आते हैं – डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, मदर टेरेसा, लता मंगेशकर। ये वही लोग हैं जिनकी वजह से हमारा देश दुनिया में अलग पहचान बना पाया है। इस टैग पेज पर हम उनके कहानी, उनके काम और कैसे उनका जीवन हमारे लिए प्रेरणा बन गया, उसपर बात करेंगे।
भारत रत्न कैसे दिया जाता है?
सरकारी प्रक्रिया बहुत सटीक होती है। हर साल राष्ट्रपति को सुझाव मिलते हैं, जिनमें से कुछ संसद के सदस्य, राज्य गवर्नर और पूर्व रिसीवर भी शामिल होते हैं। फिर एक कमेटी इन सबको देखती है, उनका सामाजिक, वैज्ञानिक या सांस्कृतिक योगदान आंकती है और अंत में राष्ट्रपति द्वारा नाम तय होते हैं। आसान शब्दों में कहें तो, यह सम्मान उन लोगों को मिलता है जिन्होंने देश के लिए कुछ बड़ा किया हो और उसका असर आज भी महसूस होता हो।
सबसे यादगार भारत रत्न पुरस्कार
पहला भारत रत्न 1954 में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को मिला, जो शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति ले आए थे। फिर 1971 में एपीजी की जेट-इंजीनियरिंग ने इस सम्मान को तकनीकी शिखर तक पहुंचा दिया। 1990 के दशक में लता मंगेशकर और मदर टेरेसा जैसे कलाकारों ने इसे कला और मानवीय कामकाज में जोड़ दिया। हर नाम अपने समय की कहानी ले कर आता है, इसलिए जब आप इनको पढ़ते हैं तो न सिर्फ इतिहास बल्कि एक प्रेरणा भी मिलती है।
क्या कभी सोचा है कि ये पुरस्कार केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी भी बन जाता है? रिसीवर अक्सर अपने मंच का उपयोग समाज में बदलाव लाने के लिए करते हैं। उदाहरण के तौर पर, डॉ. अब्दुल कलाम ने युवाओं को विज्ञान और तकनीक की ओर आकर्षित किया, जबकि मदर टेरेसा ने जरूरतमंदों को आश्रय दिया। इस तरह भारत रत्न सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि एक मिशन बन जाता है।
अगर आप अभी तक कुछ नाम याद नहीं रख पाए हैं तो चिंता न करें। यहाँ पर हम हर साल के रिसीवर की छोटी-छोटी जानकारी देते रहेंगे – कब मिला, किस क्षेत्र में काम किया और उनका सबसे बड़ा योगदान क्या था। इससे आपका ज्ञान बढ़ेगा और शायद आप भी किसी को प्रेरित कर सकें।
अंत में एक सवाल: अगर आपको भारत रत्न मिल जाए तो आप क्या करेंगे? सोचिए, यह सम्मान आपके हाथों में आ गया है तो किस तरह से आप देश की सेवा में इसे प्रयोग करेंगे? यही विचार हमें आगे बढ़ाता रहता है और नई पीढ़ियों को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करता है।
तो चलिए, इस टैग पेज का उपयोग करके भारत रत्न के बारे में सब कुछ जानें – उनके जीवन से सीखें, उनकी उपलब्धियों पर गर्व करें और अपने आप को भी एक बेहतर इंसान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाएँ।
बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को नई दिल्ली स्थित एम्स से डिस्चार्ज कर दिया गया है। 96 वर्षीय आडवाणी को एक छोटे से चिकित्सीय प्रक्रिया के लिए भर्ती कराया गया था। उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। यह घटनाक्रम उनके भारत रत्न से सम्मानित होने के बाद हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आडवाणीजी के योगदान की सराहना की है।